मंगलवार, 27 अगस्त 2019

पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक मंदिर और प्रसिद्ध तीर्थस्थल


पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक मंदिर

पाकिस्तान में हजारों ऐतिहासिक मंदिर थे। कभी पाकिस्तान की भूमि आर्यों की प्राचीन भूमि हुआ करती थी। सिंधु नदी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान में ही बहता है। सिंधु, सरस्वती और गंगा नदी के किनारे ही भारतीय संस्कृति और सभ्यता का उत्थान और विकास हुआ। कहते हैं कि सिंधु के बगैर अधूरी है हिन्दू संस्कृति। पाकिस्तान में ही हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो के प्राचीन नगर के अवशेष मिले हैं। दुनिया का प्रथम विश्‍वविद्यालय पाकिस्तान में ही है। बंटवारे के बाद पाकिस्तान में सैंकड़ों मंदिर ध्वस्त किए गए। हम नहीं जानते हैं कि कितने मंदिरों का अस्तित्व मिटा दिया गया और उनकी प्राचीनता और महत्व क्या था। आज जो मंदिर बचे हैं वे भी उपेक्षा का शिकार हैं।

1. हिंगलाज माता मंदिर, बलूचिस्तान (Hinglaj Mata Mandir, Balochistan) या नानी मंदिर, हिंगोल नेशनल पार्क :-

सिन्ध की राजधानी कराची जिले के बाड़ीकलां में माता का मंदिर सुरम्य पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। ये पहाड़ियां पाकिस्तान द्वारा जबरन कब्जाए गए बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के समीप हिंगलाज क्षेत्र में स्थित हैं। यहां का मंदिर प्रधान 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि हिंगलाज ही वह जगह है, जहां देवी सती का ब्रह्मरंध्र (मस्तिष्क/सिर) गिरा था। यहां माता सती कोटटरी रूप में जबकि भगवान शंकर भीमलोचन भैरव रूप में प्रतिष्ठित हैं। इस मंदिर के भगवान श्रीराम ने भी दर्शन किए थे। मनोरथ सिद्धि के लिए गुरु गोरखनाथ, गुरुनानक देव जैसे आध्यात्मिक संत यहां आ चुके हैं।

2. कटासराज मंदिर, चकवाल (Katas Raj Temple, Chakwal) :-

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जिला चकवाल शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में कोहिस्तान नमक पर्वत श्रृंखला में महाभारतकालीन कटासराज नाम का एक गांव है। इस मंदिर परिसर में राम, हनुमान और शिव मंदिर खासतौर से देखे जा सकते हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जब शिवजी की पत्नी सती का निधन हुआ तो वे इतना रोए कि उनके आंसू रुके ही नहीं और उन्हीं आंसुओं के कारण 2 तालाब बन गए। इनमें से एक राजस्थान में पुष्कर है और दूसरा यहां कटाशा में है। हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव ने सती से शादी के बाद कई साल कटासराज में ही गुजारे थे। यह मंदिर करीब 900 साल पुराना है।

3. नृसिंह मंदिर :-

भक्त प्रह्लाद ने भगवान नृसिंह के सम्मान में एक मंदिर बनवाया था, जो वर्तमान में पाकिस्तान स्थित पंजाब के मुल्तान शहर में है। इसे प्राचीनकाल में श्रीहरि के 'भक्त प्रह्लाद का मंदिर' के रूप में जाना जाता था। इस मंदिर का नाम प्रह्लादपुरी मंदिर है। मुल्तान के विश्वप्रसिद्ध किले के अंदर बना यह मंदिर किसी जमाने में मुल्तान शहर की पहचान हुआ करता था। होली के समय यहां विशेष पूजा-अर्चना आयोजित की जाती है। वैसे इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहीं नरसिंह भगवान ने एक खंभे से निकलकर प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप को मारा था। यह भी माना जाता है कि होली का त्योहार और होलिकादहन की प्रथा भी यहीं से आरंभ हुई थी।

4. पंचमुखी हनुमान मंदिर, कराची (Panchmukhi HAnuman Mandir, Karachi) :-

पाकिस्तान के कराची में स्थित 1500 साल पुराने पंचमुखी हनुमान मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। यह मंदिर भारतीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ पाकिस्तान में भी काफी मशहूर है। मान्यता है कि इस मंदिर में एक बार भगवान राम आ चुके हैं। नागरपारकर के इस्लामकोट में पाकिस्तान का यह इकलौता ऐतिहासिक राम मंदिर है। एक और पंचमुखी हनुमान मंदिर कराची के शॉल्जर बाजार में बना है। इस मंदिर को जीर्णोद्धार की सख्त जरूरत है। यहां के पंचमुखी हनुमान की मूर्ति अद्भुत है।

5. गोरखनाथ मंदिर, पेशावर (Gorakhnath Mandir, Peshawar) या गोरखत्री :-

पाकिस्तान के पेशावर में गोरखनाथ मंदिर है। यह मंदिर 160 साल पुराना है। यह मंदिर बंटवारे के बाद से ही बंद पड़ा था, लेकिन पेशावार हाईकोर्ट के आदेश पर नवंबर 2011 में इसे दोबारा खोला गया।

पेशावर को दुनिया के प्राचीनतम शहरों में गिना जाता है। ह्वेन सांग ने इस मंदिर का जिक्र किया है, पर उस समय यहां बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा थी। इस मंदिर से मुगल-सिख और ब्रिटिश परंपरा जुड़ी रही है। तालिबान ने कुछ महीने पहले इस पर हमला किया था।

6. गौरी मंदिर, थारपारकर (Gauri Mandir Tharparkar) :-

गौरी मंदिर सिन्ध प्रांत के थारपारकर जिले में है। पाकिस्तान के इस जिले में अधिकतर आदिवासी हैं जिन्हें थारी हिन्दू कहा जाता है। मध्यकाल में बने इस मंदिर में हिन्दू और जैन धर्म के अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हुई हैं। पाकिस्तान के कट्टरपंथियों के बढ़ते प्रभाव के कारण यह मंदिर भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है।

6. मरी इंडस मंदिर, पंजाब (Mari Indus, Punjab) :-

पंजाब के कालाबाग में स्थित यह मंदिर मरी नामक जगह पर है, जो कभी गांधार प्रदेश का हिस्सा थी। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपनी पुस्तक में मरी का उल्लेख किया है। 5वीं सदी में बना यह मंदिर स्थापत्य की दृष्टि से अद्भुत है, लेकिन उपेक्षा के कारण खंडहर हो चुका है।

7. श्री वरुणदेव मंदिर, मनोरा कैंट, कराची (Varun dev Mandir, Manora, Karachi) :-

1,000 साल पुराने इस अद्भुत मंदिर को 1947 में बंटवारे के बाद भू-माफियाओं ने अपने कब्जे में ले लिया था। 2007 में पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने इस बंद पड़े और क्षतिग्रस्त मंदिर को फिर से तैयार करने का फैसला किया। जून 2007 में इसका नियंत्रण पीएचसी को मिल गया, लेकिन इस मंदिर की देखरेख नहीं है।

8. श्री स्वामी नारायण मंदिर, कराची (Swaminarayan Mandir, Karachi) :-

स्वामीनारायण मंदिर सिंध प्रांत के कराची के एमए जिन्ना रोड पर स्थित है। यह मंदिर 161 साल पुराना बताया जाता है और यह 32,306 स्क्वॉयर क्षेत्र में फैला हुआ है। अप्रैल 2004 में मंदिर ने अपनी 150वीं सालगिरह मनाई। मंदिर में बनी धर्मशाला में लोगों के ठहरने की भी व्यवस्था है। जिसका इस्तेमाल हिंदू और मुस्लिम दोनों करते हैं। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां हिन्दुओं के साथ-साथ मुस्लिम भी पहुंचते हैं। यह मंदिर भी कट्टरपंथियों की भेट चढ़ गया है। मंदिर के हालात ज्यादा सही नहीं है।

9. साधु बेला मंदिर, सुक्कुर (Sadhu Bela Temple, Sukkur) :-

8वें गद्दीनशीं बाबा बनखंडी महाराज की मृत्यु के बाद संत हरनामदास ने इस मंदिर का निर्माण 1889 में कराया। सिन्ध प्रांत के सुक्कुर में बाबा बनखंडी महाराज 1823 में आए थे। उन्होंने मेनाक परभात को एक मंदिर के लिए चुना। यहां होने वाला भंडारा पूरे पाकिस्तान में मशहूर है।

10. राम मंदिर, सैदपुर :-

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के आसपास और पंजाब के रावलपिंडी शहर में कई ऐतिहासिक मंदिर और गुरुद्वारे मौजूद हैं। इस्लामाबाद में पुराने समय के 3 मंदिर हुआ करते थे। एक सैयदपुर, दूसरा रावल धाम और तीसरा गोलरा के मशहूर दारगढ़ के पास है। सैयदपुर गांव में स्थित राम मंदिर के बारे में कहा जाता है कि ये राजा मानसिंह के समय में 1580 में बनवाया गया था।

11. राम पीर मंदिर, सिंध (Rama Pir temple, Sindhi) :-

राम पीर मंदिर पाकिस्तान के सिंध में स्थित है। सिंध में दलित हिंदुओं और मुसलमानों का प्रमुख धर्म स्थल रामा पीर मंदिर। इस मंदिर की मीनारों पर देवी-देवताओं के झंडे लगे हुए हैं। इसमें भगवान की तस्वीरें बनी हुई हैं। इस मंदिर में अक्सर तीर्थ यात्रियों का आना जाना लगा रहता है।

हर साल इस राम पीर मंदिर में एक मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें भारत से बहुत से हिन्दु भाग लेने जाते हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर काफी पुराना है पर इसके इतिहास के बारे में कोई जानकरी कम ही मिलती है।

इस मंदिर में होने वाले मेले में पाकिस्तान के मुसलमान भी भारी मात्रा में आते हैं। इस मंदिर को भगवान रामदेव महाराज के रूप में भी जाना जाता है।

12. आदित्य सूर्य मंदिर (Aditya Sun Temple, Multan) :-

आदित्य सूर्य मंदिर पंजाब पाकिस्तान के मुल्तान में पड़ता है जो पाकिस्तान की सबसे अधिक आबादी वाले हिस्से में से एक है। यह मंदिर मुल्तान के तांबे के बाज़ार में स्थित है।

इस मंदिर में स्थापित 10वीं सदी की प्रसिद्ध आदित्य मूर्ति को मुल्तान के इस्माइली शासकों के वंश द्वारा नष्ट कर दिया गया था।

माना जाता है कि सूर्य मंदिर को अपने कुष्ठ रोग के लक्षणों से राहत पाने के लिए श्री कृष्ण के पुत्र सांबा ने इस मंदिर क निर्माण करवाया था।

इसके आलाव यह भी कहा जाता है कि ह्वेन त्सांग ने 641 ईस्वी में इस मंदिर का दौरा किया था क्योंकि सूर्य मंदिर प्राचीन भारत के सबसे महत्वपूर्ण सूर्य मंदिरों मे से एक था।

तब ह्वेन त्सांग ने मंदिर के लिए शुद्ध सोने से बनी एक बड़ी लाल माणिकों की आंखों की बनी मूर्ति बनवाई थी। हालांकि बाद में मुस्लिम शासन के दौरान इस मंदिर को नष्ट किया गया था।

13. जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Mandir, Sialkot) :-

जगन्नाथ मंदिर पाकिस्तान के पंजाब के जिले सियालकोट में स्थित है। यह पाकिस्तान में स्थित हिन्दुओं के सबसे पुराने और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। दूर-दूर से लोग इसके दर्शन करने के लिए आते हैं। इतना ही नहीं हिन्दू के साथ-साथ मुस्लिम श्रद्धालु भी इस मंदिर में आते हैं।

शुरुआत में पाकिस्तान में हिन्दू मंदिरों की संख्या काफी थी पर समय के साथ-साथ यह कम होती गई। ऐसे में हजारों साल पुराने इस मंदिर की महत्ता आप ही बढ़ जाती है।

2007 में इसके रखरखाव के लिए पंजाब (पाकिस्तान) के तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी परवेज़ इलाही ने 200,000 रुपये दिये, ताकि यह मंदिर फिर से पहले जैसा बनाया जा सके।

14. लक्ष्मी नारायण मंदिर, कराची (Shri Laxmi Narayan Mandir, Karachi) :-

पाकिस्तान के कराची के नेटिव जेट्टी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर कराची का जाना माना मंदिर है। जहां पर त्योहारों पर एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है।

15. वाल्मीकि मंदिर, लाहौर (Valmiki Temple, Lahore) :-

पाकिस्तान के पंजाब वाले क्षेत्र में स्थित लाहौर शहर में नील गुंबद इलाके में ऋषि वाल्मीकि का मंदिर है। ऋषि वाल्मीकि ने हिंदु महाकव्य रामायण की संस्कृत में रचना की थी। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के इस इलाके में रामायण उर्दू में पढ़ी और बोली जाती है।

शारदा पीठ मंदिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर :-

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रसिद्ध शारदा देवी मंदिर स्थित है। इस मंदिर की आखिरी बार मरम्मत महाराजा गुलाब सिंह ने करवायी थी। कट्टरपंथियों के लगातार हमले से यह मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। हमलों की वजह से मंदिर में लगी मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

रोहतास फोर्ट मंदिर, झेलम, जी टी रोड :-

इस फोर्ट का निर्माण पश्तून राजा शेर शाह सूरी के शाशन के दौरान 1541 से 1548 के बीच हुआ। इस फोर्ट के अंदर काफी कम मंदिर हैं।

हिन्दू मंदिर, उमेरकोट, सिंध :-

शिव मंदिर उमेरकोट क्षेत्र में स्थित एक लोकप्रिय मंदिर है, जो राणा जहांगीर गोथ की जगह के पास पाकिस्तान के सिंध इलाके में है। रस्ते में हज़रत निमानो शाह दरगाह भी आता है। हर साल महाशिवरात्रि के दिन यहाँ पर तीन दिनों का भव्य आयोजन होता है जहाँ आस पास के क्षेत्र से कई श्रद्धालु आते हैं। स्‍थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर की खास मान्यता  है कि यहां पर स्‍थापित शिवलिंग का आकार चमत्कारिक रूप से प्रतिवर्ष बढ़ता है।

ऐसा माना जाता है कि हज़ारों साल पहले एक आदमी अपनी गायों को वहां से चारा खिलाया करता था। वहां पर भारी मात्रा में घास होती थी इसलिए वह आदमी अपनी गायों को वहां चारा खिलाने ले आया करता था। पर एक दिन उसने देखा कि गाय कहीं और जाकर एक लिंगम पर दूध दे देती थी, जो ज़मींन से काफी ऊपर नहीं था। उस आदमी ने कुछ दिनों तक इस चीज़ को देखा और सोचा कि गाय लिंगम को दूध क्यों दे रही है। जब लोगों ने वहां आकर देखा तो उन्हें शिव लिंगम मिला और वहां पर शिव मंदिर बनवाया गया।

हिन्दू मंदिर, सिआलकोट, पंजाब :-

यह ऊंचा शवाला तेजा सिंह खाकिं अख्तर के धारोवाल मोहल्ले में इक़बाल रोड के हाजी नज़ीर अहमद मार्किट में 1000 फीट पर स्थित है और वहां जाने के लिए आपको सीढ़ियां लेनी पड़ेंगी।

यह हिन्दू प्रजातीय आबादी का प्रतीक है जो विभाजन से पहले पूजा किया करते थे, दिवाली, दशहरा और होली अपने परिवार वालों के साथ मनाया करते थे।

अब बच्चे इसकी दहलीज पर खेलते हैं और विभाजन के बाद यहाँ पर कोई भी मरम्मत का काम नहीं हुआ।

कालका केव मंदिर, अरोर, रोहरी सिंध के पास :-

कालका देवी मंदिर एक पहाड़ी गुफा के अंदर स्थित है जहाँ पर यह माना जाता है कि भगवती साक्षात प्रकट हुईं थीं। इस मंदिर में कई सुरंग हैं जो इसे बलूचिस्तान के हिंगलाज मंदिर से जोड़ता है।

इस क्षेत्र को जिन पहाड़ों ने घेरा हुआ है वह आजकल कंपनियों की मेहरबानी पर हैं जो पैसों के लिए पत्थरों को तोड़ने में लगी हैं। मंदिर के रखवाले की सुनें तो मंदिर में आने वाले 60 प्रतिशत से ज़्यादा लोग हिन्दू न होकर मुसलमान या दूसरे सम्प्रदाय के हैं।

हिन्दू मंदिर, चिन्योट, पंजाब :-

चिन्योट पंजाब के चेनाब नदी के बाएं किनारे पर स्थित है जो पाकिस्तान के सबसे पुराने शहरों में से एक है। इस हिन्दू मंदिर को महाराजा गुलाब सिंह ने बनवाया था। यह चिन्योट शहर के ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। इस अद्भुत मंदिर को दूसरे एंग्लो- सिख लड़ाई के दौरान बनवाया गया

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा :-

पाकिस्तान में स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सिखों के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार है। यह सिखों के प्रथम गुरु नानक देवजी का निवास स्थान था और यहीं पर वे ज्योति में समा गए थे।

* पाकिस्तान के भेरा में स्थित एक मंदिर :-

* सिंध प्रांत के नागरपारकर में स्थित बोधेश्वर जैन मंदिर :-

* रावलपिंडी के पास स्थित जर्जर अवस्था में एक मंदिर :-

* सियालकोट, पंजाब :-

* टीला जोगिया (पंजाब) :-

* रावल लेक के पास (इस्लामाबाद) :-

* श्री बादोकी मंदिर (गुजरानवाला, पंजाब) :-

* लाहौर में अनारकली बाजार के पास स्थित मंदिर :-

* पेशावर सैन्य छावनी के पास का वाल्मीकि मंदिर, जो नेहरू कैबिनेट के पुनर्वास मंत्री मेहरचंद खन्ना की मिल्कियत थी और जहां 1946 में महात्मा गांधी आए थे।

* सक्खर स्थित साधुवेला मंदिर का भी जिक्र है, जिसे कुंभ के समानांतर तीर्थ बनाने की योजना थी।

* पाकिस्तान में कराची का दर्यालाल संकट मोचन मंदिर है। स्‍थानीय लोग इसे झूले लाल मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर में हनुमान जी और गणेश भगवान की मूर्ति है।

पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के मुताबिक़, इस समय देश भर में सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के ऐसे 1,400 से अधिक पवित्र स्थान हैं जिन तक उनकी पहुंच नहीं है। या फिर उन्हें समाप्त कर वहां दुकानें, खाद्य गोदाम, पशु बाड़ों में बदला जा रहा है। ऐसा ही एक मंदिर, रावलपिंडी के एक व्यस्त बाज़ार में मौजूद है जिसे यमुना देवी मंदिर कहा जाता है और यह 1929 में बनाया गया था। चारों ओर छोटी दुकानों में धंसा यह मंदिर केवल अपने एक बचे हुए मीनार के कारण अब भी सांसें ले रहा है। उसके अंदर प्रवेश से पहले छतों से बातें करती ऊँची क़तारों में चावल, दाल और चीनी से भरी बोरियों से होकर गुज़रना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की अनदेखी और ग़लत नीतियों के कारण देश में सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से हैं, जिन्हें पिछड़े होने के कारण हमेशा नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है। शोधकर्ता रीमा अब्बासी के अनुसार, “पिछले कुछ वर्षों में लाहौर जैसी जगह पर एक हज़ार से अधिक मंदिर ख़त्म कर दिए गए हैं। पंजाब में ऐसे लोगों को भी देखा है जो नाम बदल कर रहने को मजबूर हैं। ”वो कहती हैं, “इन सभी बातों की बड़ी वजह क़ब्ज़ा माफ़िया तो हैं, मगर साथ ही बेघरों के लिए सुरक्षा की कमी भी है, जो आतंकवाद के कारण अपना घर-बार छोड़कर पाकिस्तान के अन्य ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित हो रहे हैं, उनके मुताबिक़, “मगर उन्हें वहाँ से डरा-धमका कर निकाल दिया जाता है ताकि वहां पहले से रह रहे लोगों को कोई कठिनाई न हो।”

माता सिंह भवानी देवी मंदिर

ये मंदिर 'ठट्टा' में स्थित है जो कि पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में कराची से 98 किमी पूर्व में स्थित एक ऐतिहासिक शहर है। ठट्टा पुराने जमाने में सिन्धी राजपूतों का गढ़ रहा है और यह 95 वर्षों तक सम्मॉ राजवंश के काल में सिंध की राजधानी भी रहा।

पाकिस्तान के विभिन्न प्रान्तों में स्थित एतिहासिक मंदिर :-

POK (आजाद कश्मीर)
* शारदा पीठ (शारदा देवी मंदिर)

बलूचिस्तान
* हिंगलाज, हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान 

खैबर पख्तूनख्वा
* आर्य मंदिर, एबोत्ताबाद (अवैध कब्जे के तहत / बर्बाद कर दिया)
* शिव मंदिर और दुसेहरा - एबोत्ताबाद (अवैध कब्जे के तहत / बर्बाद कर दिया)
* कृष्ण मंदिर - एबोत्ताबाद (नष्ट कर दिया / भवन अब मौजूद नहीं है)

Rawalpindi temple

* शिव मंदिर (प्राचीन) - मनसेहरा, चिट्टी स्थान
* बाल्मीकि मंदिर (वाल्मीकि) - पेशावर

पंजाब
* आदित्य सूर्य मंदिर - मुल्तान
* जगन्नाथ मंदिर - सियालकोट
* कटासराज मंदिर, कटास गांव - चकवाल
* कृष्ण मंदिर, रवि रोड, लाहौर

सिंध 
* हनुमान मंदिर, फ्रेरे रोड - कराची
* हिंगलाज माता मंदिर (जिसे जगन्नाथ अखर मंदिर कहा जाता है), भीमपुरा - कराची
* काली माता मंदिर - उमरकोट
* शिव मंदिर - उमरकोट
* कृष्ण मंदिर - उमरकोट
* श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, मूल निवासी जेट्टी - कराची

1288 हिन्‍दू मंदिरों में से केवल 31 मंदिरों में हिंदुओं को दर्शन करने की अनुमति ! - पाकिस्‍तान हिन्‍दू काउंसिल

‘पाकिस्‍तान हिन्‍दू काउंसिल’ के मुख्‍य संरक्षक रमेश कुमार वांकवानी बोले, ‘‘वर्तमान में यहां 1288 मंदिर पंजीकृत हैं; परंतु उनमें से केवल 31 मंदिरों में हिंदुओं को दर्शन करने की अनुमति दी गई है। सरकार को हमें इस प्राचीन राममंदिर का जीर्णोद्धार करने की अनुमति देनी चाहिए।’’ विभाजन के उपरांत पाकिस्‍तान छोडकर भारत आए हिंदुओं की संपत्ति की देखभाल का दायित्‍व ‘पाकिस्‍तान हिन्‍दू काउंसिल’ के पास है।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें