मंगलवार, 17 सितंबर 2019

मुगलसराय जंक्‍शन अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन

मुगलसराय जंक्‍शन रेलवे स्‍टेशन को अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम से जाना जाएगा

उत्‍तर प्रदेश के चंदौली जिले में मुगलों की निशानी माने जानेवाले मुगलों के सराय नाम से प्रसिद्ध उत्तर-पूर्व रेलवे का महत्वपूर्ण मुगलसराय जंक्शन रेलवे स्‍टेशन को रविवार (5 अगस्‍त 2018) के दिन नया नाम दे दिया गया। मुगलसराय जंक्शन को केंद्र सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय नाम दिया है। मुगलसराय जंक्शन के नए नाम के बोर्ड से परदा हटाने के लिए रेलमंत्री पीयूष गोयल, सीएम योगी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई मंत्री मौजूद रहे। मुगलसराय स्टेशन से सटे बाकले मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मुगलसराय के नए नाम का लोकार्पण हुआ। बता दें कि इस स्टेशन को भगवा रंग में रंगा गया है।

बीते वर्ष (2017) जून महीने में राज्य सरकार ने जंक्शन का नाम बदले जाने के संबंध में अधिसूचना जारी की थी। साथ ही यह तय किया गया था कि चंदौली जिले के एक महत्वपूर्ण स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय, नगरपालिका परिषद का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर रखा जाएगा। इसी के साथ ही पड़ाव पर बनने वाले दीन दयाल संग्रहालय से लेकर चौराहे का सुंदरीकरण एवं दीनदयाल की मूर्ति की बुनियाद रखी गई।

हालांकि मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलने की कवायद योगी सरकार बनते ही शुरू हो गई थी। योगी कैबिनेट ने ही मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखने का फैसला किया था, लेकिन इस फैसले का कड़ा विरोध भी किया गया था। कुछ लोगों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए स्टेशन का नाम पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखे जाने की मांग की थी। यह पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जन्मस्थली रही है। 

मुगलसराय के कोड MGS की जगह DDU का होगा प्रयोग
अब रेलवे ने भी अपने वेबसाइट से मुगससराय का नाम बदल दिया है। रेलवे की वेबसाइट, एनटीईएस और आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर अब मुगलसराय स्टेशन का कोड ‘MGS (मुगलसराय) से बदलकर DDU (दीनदयाल उपाध्याय)’ हो गया है। ट्रेन के टिकट बुक करने के लिए यही कोड डालना होगा। अब मुगलसराय जंक्शन के मुख्य भवन से ही नहीं, रेल टिकटों, रेल वेबसाइट और आईआरसीटीसी की वेबसाइट से मुगलसराय का नाम इतिहास हो गया।

उल्लेखनीय है कि मुगलसराय जंक्शन का नाम एशिया के सबसे बड़े रेलवे यार्ड के तौर पर जाना जाता है। यह दिल्ली-हावड़ा रूट के सबसे व्यस्त स्टेशन है, जहां से लाखों यात्री सफर करते हैं। यहां से तकरीबन 250 ट्रेनें रोज़ाना गुज़रती है। मुगलसराय स्टेशन पूर्वी भारत का दूसरा सबसे बड़ा स्टेशन है। 156 साल पुराने इस रेलवे स्टेशन को पूर्वी भारत का रेलवे गेट माना जाता था।

दीनदयाल का मुगलसराय स्टेशन से यह है इतिहास
क्या है नाम बदलने के पीछे की मंशा

गौरतलब है कि आरएसएस और संघ से जुड़े अन्य संगठन के दस्तावेजों के अनुसार, वे 1970 से मुगलसराय को दीनदयाल उपाध्याय नगर के रूप में संदर्भित कर रहे हैं और दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर ही मुगलसराय स्टेशन का नाम चाहते थे।

उल्लेखनीय है 11 फरवरी 1968 में कानपुर से पटना के सफर पर निकले आरएसएस-बीजेपी के विचारक दीनदयाल उपाध्याय का पार्थिव शरीर (शव) मुगलसराय स्टेशन पर रेलवे यार्ड में खंभा नंबर 1276 (722) के पास संदिग्ध हालत में पाया गया था, जिसके बाद से ही आरएसएस और संघ परिवार से जुड़े अन्य संगठन दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर ही मुगलसराय स्टेशन का नाम चाहते थे।

पं. दीनदयाल उपाध्याय की पहचान एक महान चितंक के रूप में है, वो नई सोच और प्रगतिशील शोधक के रूप में लोगों के बीच में लोकप्रिय रहे हैं। जनसंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दीन दयाल उपाध्याय का क्षत-विक्षत शरीर 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय के पास रेलवे लाइन के पास पाया गया था, तब से आज तक इस बात से पर्दा नहीं उठा कि दीन दयाल की मौत कैसे हुई।

कल्याण सिंह ने भी की थी नाम बदलने की कोशिश 
मुगलसराय स्टेशन के नाम को बदलने की कोशिश पहले भी की गई थी। लेकिन उस समय केंद्र की सत्ता पर काबिज कांग्रेस सरकार ने ऐसा होने से मना कर दिया। उस समय उत्तर परदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे। ये घटना 1992 की है।

ब्रिटिश शासनकाल (ईस्ट इंडिया कंपनी) में कोलकाता से नई दिल्ली माल ढुलाई के लिए 1862 (19वीं शताब्दी के मध्य) में हावड़ा से दिल्ली जाने के लिए रेलवे लाइन का विस्तार किया। दिल्ली के लिए लिंक 1866 में स्थापित किया गया था। मुगलसराय और वाराणसी को जोड़ने वाला पुल डफरिन ब्रिज 1887 में खुला था। वहीं 1880 में मुगलसराय रेलवे स्टेशन भवन का निर्माण किया गया। इसके बाद मुगलसराय स्टेशन का नाम प्रचलन में आ गया।

इसके अलावा 1905 में स्टेशन भवन में सुधार किया गया। मुगलसराय रेलवे स्टेशन भवन के भव्यता के लिए पंडित कमालपति त्रिपाठी ने पहल करते हुए भवन का सुंदरीकरण कराया। स्टेशन भवन निर्माण के लिए 1976 में पंडित कमलापति त्रिपाठी उद्घाटन किया।

इस क्रम में स्टेशन भवन का 1982 में निर्माण कार्य पूरा हुआ। वही 1978 में मुगलसराय स्टेशन पूर्व रेलवे का मंडलीय मुख्यालय बना। मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम एशिया में यार्ड से मशहूर है। एकलौता एशिया का यार्ड साढ़े 12 किमी में फैला है। यार्ड में 250 किमी रेलवे लाइन का संजाल बना है। यार्ड में 10 ब्लाक केबिन व 11 यार्ड केबिन है। वहीं 19वीं शताब्दी में विद्युत लोको शेड की स्थापना की गई। इसमें हावड़ा से दिल्ली तक गया होते हुए ट्रेनों का संचालन होता है। विद्युत लोको शेड में करीब 137 रेल इंजन का मरम्मत कार्य करने की क्षमता है। इसके अलावा डीजल लोको शेड की स्थापना 1962 में उत्तर रेलवे के सौजन्य से किया गया।

इसमें 72 रेल इंजनों के रखरखाव की व्यवस्था थी। हालांकि अब इसकी क्षमता बढ़ा दी गई है। मुगलसराय लोकार्पण समारोह में किसी भी व्यक्ति को काला छाता लेकर पहुंचने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। इसके अलावा काला कपड़ा पहनकर भी आने में मनाही है। इसके अलावा कोई फेंकने वाली वस्तु व पदार्थ लेकर जाने पर भी प्रतिबंध रहेगा।

जंक्शन के नाम बदलने की प्रक्रिया तब शुरू हुई, जब 2016 में संसद में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और चंदौली सांसद डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने यह मुद्दा उठाया। मोदी सरकार के प्रयास से 5 अगस्त 2018 को मुगलसराय जंक्शन का नाम जनसंघ के संस्थापक और एकात्मवाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर हो गया।

गौरतलब है कि इससे पहले भी योगी सरकार बनने के बाद कई हवाई अड्डों के नाम भी बदले गये हैं।

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