पाकिस्तान में 72 सालों से बंद पड़ा था मंदिर, हिंदू श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोला गया
पाकिस्तान के पंजाब स्थित स्यालकोट में 1000 साल पुराने एतिहासिक शिवालय तेजा सिंह मंदिर को दोबारा पूजा-पाठ के लिए खोला गया जो पिछले 72 सालों से बंद पड़ा था। जानकारी के अनुसार, 2 जुलाई 2019 को स्यालकोट के हिंदुओं को इस मंदिर की चाबियां सौंप दी गई हैं।
जानें मंदिर का संक्षिप्त इतिहास
दिवंगत लेखक राशिद नियाज के द्वारा लिखी गई ‘हिस्ट्री ऑफ सियालकोट’ के मुताबिक यह मंदिर 1000 साल पुराना है और लाहौर से 100 किलोमीटर की दूरी पर शहर के धारोवाल क्षेत्र में है।
बात 10वीं सदी की है जब देश में तेजी से जगह-जगह पर हिंदू शासक द्वारा मंदिरों का निर्माण कराया जा रहा था तो उसी समय शिवाला तेजासिंह मंदिर का भी निर्माण कराया गया था। शिवाला का अर्थ होता है। भगवान शिव का मंदिर। इसका निर्माण सरदार तेजा सिंह ने कराया था। तब से इसका नाम नाम शिवाला तेजा सिंह पड़ गया। शवाला (शिवालय) तेज सिंह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियों के सहारे चढ़ाई करनी होती है। शिवाला पुरातन भारतीय वास्तुशिल्प का अनूठा नमूना है।
शिवाला का निर्माण 1000 साल पहले अर्थात 10वीं सदी में हुआ था। इसी सदी में खजुराहो समेत दक्षिण भारत के तमाम मंदिरों का निर्माण हुआ। शिवाला तेजा सिंह पर भी इन्हीं भारतीय मंदिरों के शिल्प की छाप है। इस शिवाला के पिलर, गुंबद से लेकर छतों की बनावट तथा भव्य नक्काशी और चित्रकारी दिल को छू लेने वाली है। संरक्षण के बाद यह धार्मिक ही नहीं पर्यटन के नजरिए से भी आकर्षण होगा।
पाकिस्तान स्थित मंदिरों व गुरुद्वारा साहिबान का प्रबंध देख रहे बोर्ड ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
गौरतलब है कि अप्रैल-2019 में पाकिस्तानी सरकार ने यह घोषणा की थी कि वह अल्पसंख्यक समुदाय के 400 मंदिरों को दोबारा खोलेगी जिसे किसी वजह से बंद किया गया।
बाबरी विध्वंस के समय हुई थी तोड़फोड़
1947 में विभाजन के बाद हुए दंगों के दौरान इस मंदिर को नुकसान पहुंचा था। और यह मंदिर बंद पड़ा था। 27 साल पहले तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना लगा रहता था। दूसरी बार वर्ष 1992 में अयोध्या के बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद इसे कट्टरपंथियों ने बम से उड़ा दिया था। कई स्तंभ क्षतिग्रस्त हो गए थे। तब से यहां पर हिंदुओं को इसमें प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई।
पाक सरकार के आदेश के बाद खुला मंदिर
प्रधानमंत्री इमरान खान के निर्देश पर मंदिर को फिर खोलने का निर्णय लिया गया। क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर बिलाल हैदर ने कहा कि लोग कभी भी यहां आने को आजाद हैं। सरकार की तरफ से कहा गया है कि मंदिर का जीर्णोद्धार और रख-रखाव का काम जल्द शुरू किया जाएगा।
पाकिस्तान के स्थानीय समा टीवी से बात करते हुए एक हिंदू शख्स ने पाकिस्तान सरकार को शुक्रिया अदा किया। उसने कहा, ‘हमारे मंदिर को खोलने के लिए हम सरकार के शुक्रगुजार हैं। अब हम जब चाहे यहां आ सकते हैं।’ सरकार ने कहा है कि जल्द ही मंदिर के मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
इस मंदिर का निर्माण 1000 साल पहले हुआ था। बड़े-बड़े पिलर बनाए गए हैं। मंदिर में प्रवेश करने के लिए इन्हीं पिलरों के बीच मुख्य प्रवेश द्वार बनाया गया है। मंदिर कई मंजिल का था। हर मंजिल में अलग-अलग हिंदू देवी-देवताओं की मनमोहक मूर्तियां सुशोभित थीं।
भव्य कार्यक्रम का आयोजन
गुरुवार को श्रद्धालुओं ने मंदिर में हिंदू परंपराओं के अनुसार भव्य कार्यक्रम आयोजित (ओपेनिंग सेरेमनी) किया गया। इस दौरान हर-हर महादेव के जयकारे लगाए गए। बता दें कि पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोगों की ओर से लगातार मंदिर को खोलने की मांग की जा रही थी। इस बाबत पाकिस्तान इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) द्वारा पहल की गई थी। इस समारोह में हिंदू सुधार सभा के अध्यक्ष अमरनाथ रंधावा, डॉ मुनव्वर चंद और पंडित काशी राम सहित कई हिंदू नेता मौजूद थे।
श्राइन सचिव सैयद फराज अब्बास ने कहा 'कई सालों से हिंदू समुदाय मांग कर रहा था कि मंदिर को खोला जाए।' ईपीटीबी की पहल के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंदिर को फिर से खोलने के निर्देश दिए थे। अमरनाथ रंधावा ने कहा कि इमरान सरकार ने मंदिर खोलकर सराहनीय काम किया है। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि हिंदू समुदाय को आसानी से मंदिर में आने-जाने दिया जाए, ताकि वो रोजाना मंदिर में पूजा-पाठ कर सकें।
मंदिर के जीर्णोद्धार का काम जोरों पर है। इसके लिए ईटीपीबी ने पहली किस्त के रूप में रुपए 50 लाख रुपए दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां भारत से लाकर स्थापित की जाएंगी। साथ ही यहाँ पर नियमित पूजा-पाठ करने के लिए एक पुजारी भी रखे जाएँगे। मंदिर में एक बावर्ची और एक सेवादार रखने की भी बात कही ज रही है।
पाक सरकार शिवाला के संरक्षण पर 50 लाख रुपए खर्च करेगी। बोर्ड के चेयरमैन डॉ. आमीर अहमद ने इसके संरक्षण को जल्द शुरू करने की बात कही है। मंदिर के बचे हिस्से मजबूत हैं। इसकी छत, गुफाएं और पिलरों आदि को रिपेयर की हल्की-फुल्की जरूरत होगी। श्री गंगा राम हेरिटेज फाउंडेशन के डायरेक्टर सैयद शाहीन हसन ने बताया कि लोग भी इसके संरक्षण में यथा संभव मदद करेंगे।
मंदिर खुलने के मौके पर मिठाइयां भी बांटी गई
स्यालकोट के हिंदू समाज के मुखिया डॉ. मुनव्वर चंद, अमरनाथ रंधावा और पंडित काशी राम के नेतृत्व में मंदिर में स्थानीय हिंदुओं ने अपने धार्मिक संस्कार किए। समारोह में स्थानीय मुस्लिम भी शामिल हुए। इस अवसर पर हिंदू समाज ने मिठाइयां भी बांटी।
हवन में डाली गई आहुतियां
मंदिर में पूजा-पाठ के लिए नियुक्त किए गए पंडित काशी राम ने हवन के बाद नारियल की संपूर्ण आहुतियां डाली। मंदिर खुलने से हर्षित हिंदू समाज ने हवन में बैठ कर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। हवन के बाद पुजारी ने ओम जय जगदीश हरे आरती का गायन किया। इस मौके पर हिंदू समाज के लोगों ने गले में केसरी रंग के सिरोपे पहने हुए थे। 72 वर्षों के बाद मंदिर परिसर एक बार फिर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
कटासराज आने वालों को इस मंदिर के दर्शनों की अनुमति दे सरकार
डॉ. मुनव्वर चंद व अमरनाथ रंधावा ने पाकिस्तान सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया जाएगा कि भारत से कटासराज की यात्रा में आने वाले हिंदुओं को इस मंदिर की यात्रा की भी अनुमति दी जाए।
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है। आपको बता दें कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 75 लाख हिंदू रहते हैं, लेकिन इस समुदाय का कहना है कि यहां 90 लाख से ज्यादा हिंदू हैं।
हाल ही में पाकिस्तान के लाहौर में महाराजा रणजीत सिंह की प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। इस स्टैच्यू का अनावरण महाराजा रणजीत की 180वीं पुण्यतिथि पर किया गया।
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