सोमवार, 9 सितंबर 2019

पंचमुखी हनुमान मंदिर, पाकिस्तान


पंचमुखी हनुमान मंदिर, कराची (Panchmukhi Hanuman Mandir, Karachi), पाकिस्तान

हनुमानजी कलियुग में सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने गए हैं। शास्त्रों में राम भक्त हनुमान जी को अकेले ऐसे देवता के रूप में माना गया है जो आज भी कलियुग में जीवित हैं और वो अपने सभी भक्तों की हर मुसीबत में उनके साथ खड़े दिखाई देते हैं। इसी वजह से भारत ही नहीं दुनिभाभर में इनके भक्त मौजूद हैं। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में वैसे तो मंदिरों की संख्या काफी कम है और जो मंदिर वहां सुरक्षित बचे हैं, उनमें से एक मंदिर पंचमुखी हनुमानजी का है।

इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। कहते हैं कि यहां विराजमान हनुमानजी पिछले 17 लाख वर्षों से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर रहे हैं। जिन हिंदुओं ने विभाजन के समय अपना घर नहीं छोड़ा, उनके लिए ये मंदिर आस्था का अमिट चिह्न बन चुका है। यहां मंगलवार-शनिवार को काफी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। जिसमें केवल हिन्दू ही नहीं अन्य धर्मों के अनुयायी भी होते हैं।

सैकड़ों साल पुराना है मंदिर

ये मंदिर पाकिस्तान के कराची शहर के सोल्जर बाजार की बड़ी तंग गलियों वाली और घनी आबादी वाली जगह पर स्थित है। पंचमुखी हनुमानजी मंदिर में स्थापित हनुमानजी की मूर्ति को काफी असाधारण माना जाता है, क्योंकि लोगों का मानना है कि यह मूर्ति लाखों साल पुरानी है।

मंदिर में प्रवेश करने पर, मंदिर परिसर के बीच में जटिल नक्काशीदार पीले पत्थर की संरचना नज़र आती है। मंदिर के प्रांगण के सामने के छोटे बरामदे में एक काले और सफेद संगमरमर के फर्श के साथ दोनों ओर नक्काशीदार पीले पत्थर के खंभेहैं, इसके चारों ओर दक्षिणावर्त परिधि (परिक्रमा / प्रदक्षिणा) के लिए एक विस्तृत मार्ग है।

पंचमुखी हनुमान मंदिर कालचक्र के विभिन्न दौर से गुजरकर आज भी शान से खड़ा है। यहां मान्यता प्रचलित है कि मंदिर में स्थापित मूर्ति करीब 1500 साल पुरानी है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार आज का जो मंदिर है, उसका इतिहास 18वीं शताब्दी से जुड़ा है। इस मंदिर का पुनर्निर्माण 1882 में किया गया था। इसके बाद कई बार इसकी मरम्मत की गई। 2012 में भी इसके रेन्नोवेशन का काम शुरू हुआ और मंदिर के रूप को संरक्षित किया गया।

शास्त्रों के अनुसार रामायण काल में इस स्थान पर भगवान राम वनवास के दौरान इस मंदिर में आए थे। लिहाजा इस मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा है। 

केवल 11 मुट्ठी मिट्टी हटाने पर मिली थी हनुमानजी की पंचमुखी मंदिर

प्रचलित किंवदंती के मुताबिक, वर्तमान में जहां मंदिर स्थित है, वहां एक तपस्वी साधना किया करते थे। एक दिन सपने में पंचमुखी हनुमान का दर्शन हुए और उन्हें हनुमानजी से निर्देश मिला कि मैं इस जगह के नीचे पाताल लोक में निवास कर रहा हूं। तुम मुझे यहां स्थापित करो।

लोगों का मानना है कि आज जिस स्थान पर यह मंदिर स्थित है, उस जगह से तपस्वी ने 11 मुट्ठी मिट्टी हटाई तो और हनुमानजी (बालाजी) मूर्ति प्रकट हुई थी।

11 अंक का इस मंदिर में विशेष महत्व है। यहां की प्रबल मान्यता के अनुसार जो श्रद्धालु बालाजी की 11 परिक्रमाएं पूर्ण करता है, वे उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं। जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, वे यहां दोबारा भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। 21 परिक्रमा करने वाले को हनुमानजी पुनः दर्शन का अवसर देते हैं।

पाकिस्तान की कारोबारी राजधानी कहे जाने वाले शहर कराची के इस मंदिर के दर्शन के लिए भारत से भी काफी संख्या में श्रद्धालु जाते हैं लेकिन उन्हें पाकिस्तान सरकार से इसकी अनुमति लेनी होती है। इसकी प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल है। यहां मराठी, सिन्धी से लेकर बलूच तक सभी कम्युनिटी के लोग आते हैं।

भारत से भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और जसवंत सिंह यहां आ चुके हैं। कराची के उस मंदिर में हिंदू परंपरा के तमाम देवताओं की मूर्तियां स्थापित है।

सफेद और नीले रंग का ये 8 फीट लंबा स्टैचू कई सदी पहले इस जगह पर स्थापित किया गया था, जिस जगह पर आज मंदिर मौजूद है। कहा जाता है कि मंदिर में मौजूद पंचमुखी हनुमान की मूर्ति कोई साधारण मूर्ति नहीं है क्योंकि इस मूर्ति में हनुमान के सभी पांच रूप नजर आते हैं। हनुमानजी के पंचमुखी स्वरूप में पहला मुख वानर (हनुमान), दूसरा गरुड़, तीसरा वराह (आदिवारागा), चौथा हैयग्रीव (घोड़े का) और पांचवां नृसिंह (नरसिम्हा) का मुख है। इन पांच मुखों से हनुमानजी भक्तों की समस्याएं दूर करते हैं। हर एक मुख का अपना एक अलग महत्व है। कहते हैं, इस मंदिर में स्थापित हनुमानजी की मूर्ति स्वयंभू है, जो जमीन के अंदर से प्रकट हुई थी। ये मूर्ति इंसान की बनाई नहीं है बल्कि प्राकृतिक रुप (प्राकृतिक प्रतिमा) से बनी है।

बंटवारे के दौरान बना हिंदू और सिक्खों की ढाल

इस मंदिर को मनोकामनाएं पूर्ण करने के अलावा हिंदू और सिक्ख श्रद्धालुओं का जीवन बचाने का गौरव भी प्राप्त है। भारत-पाक विभाजन के दौरान जब कत्लेआम जोरों पर था, तब हिंदू और सिक्ख श्रद्धालुओं ने यहां शरण लेकर प्राण बचाए थे। वे लोग आज भी बालाजी का चमत्कार नहीं भूले हैं।

मंदिर के जीर्णोद्धार में मिलीं बेशकीमती मूर्तियां

04 सितंबर 2019 में इस मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के दौरान मंदिर के पुराने हिस्से में फर्श की खुदाई के दौरान कई बहुमूल्य मूर्तियां और कलाकृतिया सामने आई हैं। भगवान गणेश की मूर्ति उस वक्त मिली जब भारत समेत अन्य देशों में रहने वाले हिन्दू गणेश चतुर्थी का त्यौहार मना रहे थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन बहुमूल्य वस्तुओं के सामने आने से मंदिर के निर्माण काल का पता लगाने में मदद मिलेगी। सोल्जर बाजार कराची की संकरी गलियों के बीच बने इस मंदिर की खुदाई का काम काफी समय से चल रहा था। ऑल पाकिस्तान हिंदू पंचायत के महासचिव रवि दावनी ने मंगलवार को पीटीआई से बातचीत में इसकी पुष्टि की कि कई मूर्तियां और कलाकृतियां मंदिर की जगह से मिली हैं।

पंचमुखी हनुमान मंदिर के न्यासी श्रीरामनाथ महाराज ने बताया कि कुछ दिन पहले जब इस मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया, तब ये कलाकृतियां मिलीं। उन्होंने कहा, 'सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हमें ज्यादा नहीं खोदना पड़ा। हमने दो या तीन फीट तक ही खोदाई की थी कि ये मूर्तियां मिलीं।' इनमें भगवान हनुमान की आठ-नौ मूर्तियां, भगवान गणेश नंदी महावीर, शेरावाली माता की मूर्तियां, भैंस जैसी प्रतिमाएं और मिट्टी के बर्तन शामिल हैं। और भी बहुत सी ऐतिहासिक महत्व की चीजें खुदाई मे मिली है। इन विभिन्न आकार की प्राप्त हुई मूर्तियों की संख्या 10 से 15 के करीब बताई जा रही है।

इस मंदिर के प्राचीन फर्श की खुदाई में मूर्तियों के अलावा एक हवन कुंड और एक छोटी सुरंग भी मिला जहाँ एक अस्थि कलश रखा था। शायद यह अस्थि कलश किसी साधु-संत की होगी। इस कलश के समीप ही किसी व्यक्ति के कुछ निजी सामान भी मिले हैं। ऐसा लगता है ये जगह अपने आप धंस गई थी जिसमें ये सारी चीज़ें अंदर समा गई और तभी से ये ज़मीन के अंदर ही है।

इन प्राचीन मूर्तियों के बारे में कहा जा रहा है की ये बेशकीमती हैं। बताया जा रहा है की इन मूर्तियों का निर्माण कीमती पीले पत्थरों से किया गया है और सैकड़ों साल जमीन के अंदर रहने के बाद भी इस पर लगे सिन्दूर को अभी भी देखा जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ की इन मूर्तियों की प्राचीन काल में पूजा भी की जाती होगी और कालान्तर में किन्ही कारणों से इन्हे जमीन में दबा कर छुपा दिया गया होगा।

मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह मूर्तियां पंद्रह सौ साल पुरानी हैं। हालांकि उनका कहना है कि जांच करने के लिए पुरातत्वविदों को बुलाया गया है। मंदिर प्रबंधन ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि इस मंदिर को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर वह इसके पुनर्निर्माण में योगदान दे।

कैसे पहुंचें

कराची पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर है। और इसे सिन्ध प्रान्त की राजधानी भी कहा जाता है। ये शहर अरब सागर के तट पर बसा है और पाकिस्तान का सबसे बड़ा बंदरगाह भी है।

कराची पाकिस्तान का एक बड़ा शहर है। यहां पर एयरपोर्ट, रेल मार्ग और सड़क मार्ग की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं। भारत से वायु मार्ग से कराची पहुंच सकते हैं। कराची में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मदद से इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

पंचमुखी हनुमान मंदिर के आस-पास घूमने की जगह

1. स्वामीनारायण मंदिर - कराची में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्वामीनारायण नाम का मंदिर है।
2. माता मंदिर - कराची में हनुमान मंदिर से कुछ दूरी पर ही मां काली का मंदिर है।


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