रविवार, 15 सितंबर 2019

गुरुद्वारा चोवा साहिब, पाकिस्तान

72 साल बाद श्रद्धालुओं के लिए खुला गुरुद्वारा

पाकिस्तान ने बंटवारे के 72 साल बाद 2 अगस्त 2019 (शुक्रवार) को पंजाब प्रांत के झेलम जिले में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चोवा साहिब को शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया। इसका निर्माण 1834 में महाराजा रणजीत सिंह ने कराया था। 1947 में भारत-पाक के विभाजन के दौरान यहां रहने वाले सिख समुदाय के लोग पलायन कर गए। इसके बाद सरकार की अनदेखी के चलते गुरुद्वारा पूरी तरह से बंद था।

पाकिस्तान सरकार गुरुद्वारा चोवा साहिब को खोलने का फैसला नवंबर में गुरुनानक देव की 550वीं जयंती के मद्देनजर लिया है। सिख समुदाय के लोग इसे खोलने की लंबे समय से मांग कर रहे थे। अब भारत और पाकिस्तान के सिख श्रद्धालु गुरुद्वारे में दर्शन के लिए जा सकेंगे। 185 साल पुराने इस गुरुद्वारे के पुर्ननिर्माण में लाखों रुपये खर्च होंगे जिसे निष्क्रांत ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड (ईटीपीबी) जल्‍द ही शुरू कराएगा।

यूनेस्को (UNESCO) के विश्व विरासत स्थल रोहतास किले के उत्‍तरी किनारे पर 19वीं सदी का ऐतिहासिक गुरुद्वारे को उच्च अधिकारियों और सिख समुदाय के लोगों की उपस्थिति में खोला गया। इस दौरान यहां भव्य कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। समारोह के दौरान केसरी निशान साहिब के साथ पाकिस्तानी झंडे भी लहराए गए।

सिख समुदाय के लोगों ने अरदास की

गुरुद्वारा खुलने के बाद सिख समुदाय ने यहां अरदास (प्रार्थना) और कीर्तन (भक्ति गीत) की प्रस्तुति दी। इस मौके पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थानों की देखरेख करने वाले इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के चेयरमैन डॉ. आमीर अहमद इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। डॉ. अहमद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थलों की देखरेख का जिम्मा संभालते हैं। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (Pakistan Sikh Gurdwara Prabhandhak Committee) (पीएसजीपीसी / PSGPC) के अध्यक्ष सरदार सतवंत सिंह भी मौजूद थे।

भारत के सिख ‌श्रद्धालु भी यहां आ सकेंगे

ईटीपीबी के प्रवक्ता आमीर हाशमी ने बताया, ‘‘गुरुद्वारा चोवा साहिब को प्रार्थना और दर्शन के लिए खोला गया है। इसमें भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों से सिख समुदाय के लोग दर्शन के लिए आ सकते हैं। इस ऐतिहासिक जगह पर आने के लिए सभी का स्वागत है। गुरुद्वारे का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है।’’

पाकिस्‍तान सरकार ने सियालकोट में 500 साल पुराने गुरुद्वारा को भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए हाल ही में खोला गया। हालांकि पहले यह गुरुद्वारा पाकिस्‍तान के साथ यूरोप, कनाडा और अमेरिका के श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता था लेकिन भारतीय श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी।

महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया

बता दें कि 1834 में महाराजा रंजीत सिंह द्वारा गुरुद्वारा साहिब के भवन का निर्माण करवाया गया था। गुरुद्वारा साहिब का भवन तीन मंजिला है, जिसमें 23 खिड़कियां और चार-चार फुट चौड़ी दीवारों का निर्माण किया गया था। 72 वर्ष तक बंद रहे गुरुद्वारा साहिब में बनी भित्ति चित्रकला लगभग लुप्त हो चुकी है।

मान्यता: गुरुनानक ने प्रथ्वी पर प्रहार कर सूखे का परेशानी दूर की थी

जनवरी 2019 में पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने गुरुद्वारा चोवा साहिब की यात्रा की थी। पाकिस्तान के इतिहासकार शाहीद सब्बीर ने गुरुवार को गुरूद्वारे के यात्रा की थी।

गुरु नानक देव की यात्रा के बाद उन्होंने झेलम में कुछ समय व्यतीत किया था। शब्बीर ने बताया कि “घन नदी के किनारे सूखे जैसे हालात हो रहे थे और स्थानीय लोगो के लिए पीने के पाने की कमी हो रही थी। जब लोगो को पता लगा कि एक संत इस इलाके में हैं तो वे बाबा नानक तक पंहुचे जिनके आशीर्वाद से जमीन से एक ताजा पानी निकलकर आया, जिसे अमृत कुंड कहा जाता है।”

शब्बीर ने बताया कि “महाराजा रंजित सिंह अमृत कुंड के पानी से ही स्नान और पीने के लिए इस्तेमाल करते थे। उनके लिए यह पानी लाहौर तक ले जाया जाता था।”

ऐसा माना जाता है कि अपनी यात्रा के दौरान गुरु नानक देव ने यहीं पानी का एक झरना बनवाया था जिसे ‘उदासी’ के नाम से जानते हैं। कहा जाता है कि 1521 में गर्मी के मौसम में गुरु नानकजी और भाई मर्दाना तिल्ला जोगियन (Tilla Jogian) मंदिर से लौट रहे थे और इसी स्थान पर रुके थे। तभी भाई मर्दाना को प्‍यास लगी और गुरु नानकजी ने अपने कमंडल से धरती (पृथ्वी) पर चोट की और एक पत्‍थर हटाते ही प्राकृतिक पानी का स्रोत (झरने / चोवा) फूट पड़ा। यह झरना अब भी यहां मौजूद है। तब यह इलाका भयंकर सूखे की चपेट में था। चोवा (चोआ) एक पंजाबी शब्द है जिसका मतलब होता है "नेचुरल वाटर स्प्रिंग"।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगवाल ने कहा कि “72 वर्षों के बाद गुरुद्वारा खारा साहिब, गुरुद्वारा चोवा साहिब को खोलने पर पाकिस्तानी सरकार की कार्यप्रणाली की तारीफ की है। पाकिस्तान का कार्य दोनों देशों को करीब लाने का कार्य करेगा।” PSGPC ने मार्च 2016 में पेशावर के भाई बीबा सिंह गुरुद्वारे को फिर से खोला था। 

PSGPC के एक मेंबर ने इस बारे में बात करते हुए कहा- 'विभाजन के बाद से ही ये गुरुद्वारा बंद पड़ा था क्योंकि इसकी देख-रेख के लिए कोई नहीं था। अब इसे रिनोवेशन के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला जा रहा है। पाकिस्तान में मौजूद करीब 25000 सिखों को यहां तक पहुंचने में आसानी होगी। पाकिस्तान के चार मुख्य शहर लाहौर, रावलपिंडी, इस्लामाबाद और पेशावर से यहां पहंचने में सिर्फ़ 2-4 घंटे का ही समय लगता है। ये पाकिस्तान में सिख विरासत को संरक्षित करने का एक और उदाहरण है।'

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें