श्री वरुणदेव मंदिर, मनोरा कैंट, कराची (Varun dev Mandir, Manora, Karachi)
वरुण देव मंदिर सिंध के पाकिस्तान के कराची जिले के मनोरा आईलैंड में स्थित है। देश के अन्य हिस्सों की तुलना में कराची 'धर्मनिरपेक्ष' है और पाकिस्तान में और जगह के मुकाबले सिंध में हिंदुओं की संख्या कहीं ज्यादा है। यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है और समुद्र के देवता वरुण को समर्पित है। शायद यह केवल एकमात्र मंदिर है और निश्चित रूप से पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पुराना और सबसे बड़ा हिंदू देवता को समर्पित है। कहते हैं 16वीं सदी से मंदिर अस्तित्व में था, लेकिन मौजूदा स्ट्रक्चर 1917-18 का बना हुआ है। इस मंदिर में मई-जून के महीने में सबसे ज्यादा भक्तों की तादाद देखने को मिलती है।
इस मंदिर पर कई बार हमला किया जा चुका है, जिसकी वजह से मंदिर का काफी भाग नष्ट हो चुका है। इस अद्भुत मंदिर को 1947 में बंटवारे के बाद भू-माफियाओं ने अपने कब्जे में ले लिया था। 2007 में पाकिस्तान हिन्दू काउंसिल ने इस बंद पड़े और क्षतिग्रस्त मंदिर को फिर से तैयार करने का फैसला किया। जून 2007 में इसका नियंत्रण पीएचसी को मिल गया, लेकिन इस मंदिर की देखरेख नहीं है। और कट्टरपंथियों की वजह से मंदिर का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ।
शौचालय के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है मंदिर
मंदिर पाकिस्तान के लिए एक विरासत का प्रतीक होना चाहिए। परंतु डेली टाइम्स ने 2008 में यह रिपोर्ट दी थी कि मंदिर का एक हिस्सा शौचालय के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। जब पूजा के लिए मंदिर इस्तेमाल होता था तब 1950 के दशक में हिंदू समुदाय ने 'लाल साईं वरुण देव' का त्यौहार आखिरी बार मनाया गया था। अब मंदिर के कमरे और परिसर शौचालय के रूप में उपयोग किए जाते हैं। यह हिंदू समुदाय का बड़ा अपमान है। मंदिर का ख्याल रखने वाले जीवरीज ने बताया कि कोई भी अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान नहीं करता है।
मनोरा छावनी बोर्ड ने नहीं दिया कोई जवाब
मंदिर मनोरा द्वीप पर स्थित है जो इसे पाकिस्तानी नौसेना के अधिकार क्षेत्र में लाता है। मीडिया द्वारा मंदिर के स्वामित्व के बारे में पूछताछ करने के लिए सैन्य संपत्ति अधिकारी (एमईओ) से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला और जब जीवराज ने मनोरा छावनी बोर्ड (एमसीबी) को लिखा तो उन्हें बताया गया कि यहां कोई रिकॉर्ड नहीं है।
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