विचित्र मंदिर जहां चढ़ाये जाते हैं लकड़ी के लिंग (Chao mae tuptim temple)
दुनिया भर में कई देवी-देवताओं के मंदिर विद्यमान हैं। सभी अपने विशेष कारण के चलते प्रसिद्द हैं। इनमें से कुछ मंदिर तो ऐसे हैं जो कि अजीब कारणों से प्रसिद्द हैं। ऐसे कारण जिन पर विश्वास करना भी मुश्किल हैं। ऐसे ही एक मंदिर हैं जो इस कारण से प्रसिद्द हैं कि वहाँ पर पुरुषों के लिंग (penis) चढाने का प्रावधान हैं। लेकिन ये लिंग असली नहीं बल्कि लकड़ी के होते हैं। सुनकर अजीब जरूर लगता है, लेकिन यह बिलकुल सच हैं।
मंदिर के आस-पास पहुंचने पर ही आपको यहां का अनोखापन हैरान कर देगा। मंदिर के आस-पास आपको लड्डू और मिठाइयों की दुकानें नजर नहीं आएंगी। यहां दुकानों पर आपको लकड़ी के बने हुए रंग-बिरंगे लिंग दिख जाएंगे जिन्हें खरीदकर लोग देवी को भेंट करते हैं।
इस देवी को चढ़ाते हैं भेंट में लिंग
यह अनोखा मंदिर थाइलैंड (Thailand) में स्यान नदी के किनारे बैंकाक (Bangkok) में बना हुआ है। यह एक मठ है जिसमें चाओ माई तुप्तिम (chao mae tuptim) की पूजा होती है। श्रद्धालु इन्हें लकड़ी, पत्थर, रबड़ के बने छोटे और बड़े लिंगों को भेंट के रूप में लोग चढ़ाते हैं। इस परंपरा की शुरुआत कैसी हुई इसको लेकर कोई ठोस और अस्पष्ट जानकारी लोगों के पास नहीं है।
मान्यता अनुसार लिंग भेंट करने से चाओ माई खुश होकर महिलाओ को प्रजनन क्षमता का वरदान देने के अलावा यौन सम्बन्धी समस्या से छुटकारा दिलाती हैं।
लिंग चढ़ाने की परंपरा और कथा
एक कथा के अनुसार नाइ लर्ट नामक के व्यक्ति ने इस धारणा के कारण यहां पर एक मंदिर बनावा दिया कि यहां वृक्ष पर किसी पवित्र आत्मा का निवास है। लोग यहां पर सुगंधित फूल, चंदन चढ़ाते थे।
ऐसे हुई लिंग चढ़ाने की परंपरा शुरू
एक बार किसी महिला ने संतान प्राप्ति की इच्छा से यहां पर लकड़ी का लिंग भेंट किया उसके बाद वह गर्भवती हो गई। एक दूसरे से सुनकर इस कहानी का प्रचार होता चला गया और यहां लिंग चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।
प्रजनन शक्ति के लिए मांगते हैं दुआ
चाओ माई को बुद्ध पूर्व काल की एक वृक्ष-देवी माना जाता है। चाओ माई तुप्तिम को प्रजनन शक्ति की देवी माना जाता है। इस मंदिर में पूर्वी एशिया (East Asia) के कई देशों सहित पूरे थाईलैंड से श्रद्धालु (महिलाएं) आकर अपने लिए प्रजनन शक्ति की प्रार्थना करते हैं और इन्हें चढ़ावे के रूप में लिंग भेंट करते हैं।
मान्यता तो यह भी है कि निसंतान महिलाएं यहां आकर लिंग चढ़ाती हैं और देवी से संतान सुख की प्रार्थना भी करती हैं। देवी के आर्शीवाद से महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
लिंग के अलावा यह भी चढता है देवी को
गौरतलब है कि प्रचीन सिंधु घाटी सभ्यता में भी लिंग और योनि पूजा के प्रमाण पाए गए हैं, इसी तरह यह मंदिर भी उसी प्राचीन संस्कृति की पहचान माना जाता है। इस मंदिर में पुरुषों का जाना निषिद्ध है, इस मंदिर में केवल महिलाएं ही जा सकती है।
लोगों में इस मंदिर और देवी चाओ माई के प्रति गहरी आस्था और विश्वास है। ऐसा कहा जाता है कि श्रद्धालुओं को यहां आकर संतान सुख की प्राप्ति होती है। मंदिर में चमेली के पुष्प की माला, अगरबत्ती और कमल के फूल की कलियां भी अर्पित की जाती हैं। चाओ माई को नर्तकी, घोड़े और हाथी की प्रतिमा भी लोग भेंट करते हैं।
लिंग का संबंध गुडलक से
मंदिर के लोग बताते हैं कि जो भी लोग पहली बार इस मंदिर में आते हैं वह यहां पर चढ़ाए जाने वाले लिंग की आकृतियां देखकर कभी-कभी असहज भी महसूस करते हैं। हालांकि थाई संस्कृति की सभ्यता से ताल्लुक रखने वाले लोग काफी खुले विचारों के हैं और आस्था की दृष्टि से मंदिर में लकड़ी से बने लिंग का चढ़ाया जाना उन लोगों के लिए सामान्य बात है। थाई संस्कृति में लिंग को लकी चार्म भी मानते हैं इसलिए लोग छोटे आकार के लिंग भी धारण करते हैं। लिंग को यहां ना सिर्फ संतान सुख से जोड़कर देखा जाता है बल्कि इसे सुख-समृद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है। बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले थाई लोग अपने घर के आगे भी लिंग की आकृति लगते हैं ताकि घर में समृद्धि बनी रहे।
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