गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

राजा राम मंदिर, मध्यप्रदेश


ओरछा के राजा है राम (ओरछा धाम)

मध्यप्रदेश में स्थित ओरछा एक छोटा सा शहर है, जो जिला टीकमगढ़ के अंतर्गत आता है। यह शहर अपने भव्य मन्दिरों और किलों के विश्व विख्यात है। यहां के भव्य शहरों और किलों को देखने हर रोज हजारों की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं। भव्य किलों और मन्दिरों के अलावा ओरछा की एक और जगह है जो इसे पर्यटकों के बीच अनूठी जगह बनाती है, और वह है राजा राम मंदिर।

भगवान राम का मंदिर, जिन्हें यहां राजा समझकर पूजा जाता है और दिन में पांच बार पुलिस द्वारा गार्ड और ऑनर भी दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी की, भगवान राम को ऑनर ऑफ़ गार्ड देने की परम्परा करीबन 400 साल पुरानी है।

राजा राम मंदिर

ओरछा में स्थित राजा राम मंदिर को ओरछा मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर में भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है, और दिन के पांचो पहर उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर प्रदान दिया जाता है।

बेहद भव्य है मंदिर

राजा राम को समर्पित यह मंदिर बेहद भव्य और आलिशान बना हुआ है। यह मंदिर देखने में एकदम महल जैसा प्रतीत होता है इसकी वास्तुकला में बुंदेला स्थापत्य का बेजोड़ नमूने को देखा जा सकता है।

क्यों मंदिर से पहले बना महल?

कहा जाता है कि मंदिर बनने से पहले यहां महल का निर्माण किया गया था, लेकिन मूर्ति को पहले ही स्थापित कर दी गयी थी, और जब मंदिर बनने के बाद मूर्ति को उस स्थान से हटाने के प्रयास किया गया तो कोई भी सफल ना हो सका और महल को ही मंदिर के रूप में परवर्तित कर दिया गया इसका नाम रखा गया राम राजा मंदिर।

रोज आते है राजा राम

कहा जाता है कि रोज यहां राज राम अयोध्या से अदृश्य रूप में आते हैं। मंदिर में राजा राम, लक्ष्मण और माता जानकी की मूर्तियां स्थापित हैं। इनका श्रंगार अद्भुत होता है। मंदिर का प्रांगण काफी विशाल है।

मंदिर के खुलने और बंद होने का समय

गौरतलब है कि ये राजा का मंदिर है इसलिए इसके खुलने और बंद होने का समय भी तय है। सुबह में मंदिर आठ बजे से साढ़े दस बजे तक आम लोगों के दर्शन के लिए खुलता है। इसके बाद शाम को मंदिर आठ बजे दुबारा खुलता है। रात को साढ़े दस बजे राजा शयन के लिए चले जाते हैं। मंदिर में प्रातःकालीन और सांयकालीन आरती होती है जिसे आप देख सकते हैं।

बेल्ट

आपको बता दें कि मंदिर परिसर के भीतर बेल्ट पहनकर जाना भी इसलिए मना है क्योंकि राजा के सामने कमर कस कर जाना उनका अपमान माना जाता है इसलिए कोई भी व्यक्ति बेल्ट पहनकर मंदिर में दाखिल नहीं हो सकता। 

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