ढाकेश्वरी मन्दिर
ढाकेश्वरी मन्दिर ढाका नगर का सबसे महत्वपूर्ण मन्दिर है। ‘ढाकेश्वरी’’ का अर्थ ‘‘ढाका की देवी’’ है और विशेषज्ञों ने बताया कि बांग्लादेश की राजधानी का नाम ढाकेश्वरी के नाम पर ही पड़ा। भारत के विभाजन से पहले तक ढाकेश्वरी देवी मन्दिर सम्पूर्ण भारत के शक्तिपूजक समाज के लिए आस्था का बहुत बड़ा केन्द्र था। यह मंदिर बहुत विशाल एवं आस्था का पुराना केन्द्र होने के कारण इसे बांग्लादेश के राष्ट्रीय मंदिर के रूप में मान्यता मिली है।
कब हुआ मंदिर का निर्माण
12वीं शताब्दी में सेन राजवंश के बल्लाल सेन ने ढाकेश्वरी देवी मन्दिर का निर्माण करवाया था। करीब आठ सदी पुराने मंदिर के मूल स्वरूप के बारे में पता लगाना बहुत मुश्किल है। इसका कई बार मरम्मत एवं पुनरुद्धार किया गया।
ढाकेश्वरी पीठ की गिनती शक्तिपीठ में की जाती है क्योंकि यहां पर सती के आभूषण गिरे थे।
अलग राष्ट्र बनने के बाद इस मंदिर को भी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन माता के प्रताप से यह आज भी बरकरार है और लाखों लोगों की आस्था इससे जुड़ी है।
इतिहास
ढाका जाटों की राजधानी रही है अतः वर्तमान में जाट जाति में ढाका गोत्र अभी तक ढाका (बांग्लादेश की राजधानी) को अपना पवित्र स्थान मानते हैं और ढाका को अपनी प्राचीन राजधानी के रूप में संबंध दर्शाते हैं।
पाकिस्तान को दी थी शिकस्त
साल 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के वक्त पाकिस्तानी सेना ने इस मंदिर को नुकसान पहुंचाया था। पाकिस्तान की सेना ने इस पवित्र स्थान को शस्त्रागार बना लिया और यहां की परंपराओं का पालन नहीं किया।
जब भारत ने पाकिस्तान से लड़कर बांग्लादेश को आजाद करवाया था उस समय देश को आजाद कराने में जितना हाथ भारतीय सैनिकों का था उतना ही हाथ देवी के आशीर्वाद का भी था। ऐसा माना जाता है कि 1971 के युद्ध में भारतीय सैनिकों को मां का आशीर्वाद प्राप्त था। इस कारण पाकिस्तान को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। वहां के लोगों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना ने मां का अपमान किया और मंदिर की परंपराओं को भी तोड़ा था।
आज भी मां ढाकेश्वरी को नमन करने श्रद्धालु आते हैं और मां भी उनकी मनोकामना पूर्ण करती हैं।
राष्ट्रीय मंदिर होने के कारण यहां देश के बड़े नेताओं के जन्मदिन एवं पुण्यतिथि के मौके पर विशेष पूजा भी कराने का चलन है।
ढाकेश्वरी मंदिर में मोदी
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून 2015 में जब बांग्लादेश गए तो उन्होंने मां ढाकेश्वरी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की थी।
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